ध्यानाभ्यास के समय निद्रा से कैसे बच सकते है ?
ध्यानाभ्यास के सम्स्य नींद से बचा जा सकता है, अगर आप, जो कुछ भी अंतर में दिखाई दे, उसके बीच में आंतरिक दृष्टि को लगातार एक जगह टीकाएँ और मन्त्रों का मन ही मन जाप करें, बहुत धीरे-धीरे, चाहे रुक-रुककर, ताकि आंतरिक दृष्टि में कोई विघ्न न हो | नींद या भटके हुए विचार तभी आते हैं जब आंतरिक दृष्टि या ध्यान अस्थिर हो जाए और इसके लिए काफी कठिन प्रयास की जरूरत होती है, ताकि ध्यानाभ्यास के समय पूरी तरह जागृत और चेतन बने रहने की आदत का विकास हो सके | वास्तविकता यह है की जब आप पूरी तरह ध्यानाभ्यास में लगे होते हैं, तो चेतना अपने ठिकाने पर एकत्रित हो जाती है, जो कि आँखों के पीछे है | स्वप्न वाली निद्रा के दौरान आत्मा कंठ चक्र पर उतर आती है और गहरी नींद के समय यह नाभि चक्र तक आ जाती है | ध्यानाभ्यास के समय शरीर सोता है, पर आत्मा चेतन रहती है और उच्चतर मंडलों में प्रवेश करती है तथा चेतन रहकर इस उड़ान का आनन्द उठती है | पहली हालत को स्वप्न और दूसरी को विज़न कहते हैं | स्वप्न में आपको जो कुछ दिखें, उसकी आपको सिर्फ एक धुंधली सी याद रहती है, पर विज़न में ऐसा नहीं होता | पैगम्बर मोहम्मद साहब से जब नींद के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, " मेरा शरीर सोता है, मेरी आत्मा नहीं सोती |" गुरु नानक जी कहते हैं कि ऐसी आत्मा सदा जगती रहती है और कभी नींद नहीं लेती |
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