क्या मरने से पहले हमारे लिए उन सबको माफ़ करना जरुरी है, जिन्होंने हमारे साथ ज्यादती की हो ?
हमें 'माफ़ करो और भूल जाओ' का सिद्धांत सीखना चाहिए, जो कि शांति और सौहार्द पाने के लिए जीवन का एक सुनहरी नियम है | यह ध्यान टिकाने में बहुत सहायक होता है और इससे सफल ध्यानाभ्यास का वरदान मिलता है | जो माफ़ करता है, वह बहुत धन्य है | बदला लेना कायरता है, पर दूसरों की गलतियों को माफ़ करना सदाचार का कार्य है | सभी को सलाह है कि सोने से पहले वे अपने कर्मों का जायजा लें कि दिन में काम करते समय, क्या उन्होंने किसी को नाखुश किया है या किसी के साथ नाइंसाफी की है | यदि ऐसा है, तो वे पछतावा करें और दिव्य दया के लिए प्रार्थना करें | इस प्रकार अगर दूसरों ने, एक या दुसरे तरीकें से नुकसान पहुँचाया है तो उन्हें माफ़ क्र देना चाहिए | बाइबिल में एक बहुत अच्छा उदहारण है, जिसमें यह कहा जाता है कि जब कोई प्रार्थना में खड़ा हो, तो उससे पहले वह अपने उन भाइयों की कमियों या गलतियों को माफ़ कर दे, जिन्होंने उसके साथ ज्यादती की थी, ताकि स्वर्ग में बैठा पिता भी उसकी कमियों को माफ़ कर दे | स्पष्ट है, हमें अवश्य ही अपनी दैनिक जिन्दगी में ऐसी क्षमा भावना का विकास करना होगा | हमें अवश्य ही, इस मृत्युलोक को छोड़ने...