एक सच्चे सत्गुरू की क्या पहचान है ?

 एक सच्चा सत्गुरु रूहों को परमपिता के सच्चे घर ले जाने के कार्य में लगा होता है | एक सच्चा सत्गुरु  सिद्धांत ही नहीं बताता है , वह अपने शिष्यों को जाती या निजी अनुभव भी देता है | वह प्रभु को जानने का और पाने का रास्ता दिखाता है, जो कि अंतर में है | यह प्रश्न प्रभु के हर सच्चे जिज्ञासु को आमतौर से परेशान करता है | में इस डर से किसी भी गुरु के पास जाने की हिम्मत नहीं करता था कि कहीं मुझे अधुरा गुरु न मिल जाए और मेरा सारा जीवन बर्बाद न हो जाए | अत: मैंने, प्रभु से मार्गदर्शन के लिए सच्ची प्रार्थना की | मेरी प्रार्थना सुनी गई | 

एक सच्चे सत्गुरु  का कोई भी बाहरी स्वार्थ नहीं होता | वह अपनी मेहनत की कमाई पर गुजारा करता है | वह बाहरी दिखावे और सजावट को पसंद न करता हो| वह एक सादी जिन्दगी जिएगा और उसके विचार शुद्ध होंगे |

उसकी असली योग्यता इस बात में है कि वह भक्त की अंतर की आँख और कान खोलकर, उसे प्रभु की ज्योति और प्रभु की वाणी का कुछ जाती अनुभव दे सकता है | इस अनुभव की मात्रा निर्भर करेगी, शिष्य की पृष्ठभूमि पर और उसकी ग्र्हण शीलता पर |


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